छठ पूजा का त्यौहार महाभारत काल से ही चलती आ रही है सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण में सूरज की पूजा करने करने सूर्य भगवान के परम भक्त थे
छठ पूजा का मुख्य उद्देश्य लोग संतान प्राप्ति हेतु भी छठ पूजा का व्रत रखते हैं
छठ पूजा का व्रत दीपावली से 6 या 7 दिन के बाद शुरू होता है
छठ पूजा 4 दिन तक मनाया जाता है जिसमें हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है
पहले दिन नहाओ खाओ -: यह कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष के चक्रवर्ती को नायक हाय के नाम से भी जाना जाता है
दूसरे दिन लोहारा और खरना - :इस दिन व्रत रखने के पश्चात शाम को व्रत रखने वाले भोजन ग्रहण करते हैं
तीसरे तीसरे दिन संध्या -: छठ पूजा का विशेष दिन होता है जो कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष के पृष्ठ के दिन यानी पूजा के तीसरे दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है
चौथे दिन उषा अर्घ्य -: यह छठ पूजा के समाप्ति का दिन होता है लोग सूर्य को हुए कर देते हैं
हिंदू धर्म में सूरज के उपासना का विशेष महत्व है छठ पूजा के माध्यम से लोग डूबते और उगते हुए सूरज का अर्घ्य देते हैं
हिंदू धर्म में सूरज के उपासना का विशेष महत्व है छठ पूजा के माध्यम से लोग डूबते और उगते हुए सूरज का अर्घ्य देते हैं